विधानपरिषद का गठन संविधान के अनुच्छेद 169 के तहत किया जाता है। राज्य विधान परिषद्, राज्य का स्थाई सदन है, जिसे कभी भी भंग नहीं किया जा सकता है परन्तु इसके सदस्यों का 6 वर्ष का एक निर्धारित कार्यकाल होता है। राज्यों में विधानपरिषद् को कुछ इस प्रकार से गठित या विकसित किया जाता है कि प्रत्येक दूसरे वर्ष इसके सदस्य अपने 6 वर्ष का कार्यकाल पूरा करके सेवा निवृत्त होते हैं, जिसके स्थान पर नये सदस्यों को निर्वाचित और मनोनीत किया जाता है। राज्य विधान परिषद् की अधिकतम संख्या, राज्य विधान सभा की संख्या के ( एक-तिहाई) हो सकती है, अथवा न्यूनतम 40 हो सकती है। राज्य विधान परिषद की संरचना ( सदस्यों का निर्वाचन /मनोनयन ) सदस्य - राज्य के विधान सभा सदस्यों द्वारा निर्वाचित सदस्य - स्थानीय निकायों के सदस्यों द्वारा निर्वाचित सदस्य - राज्य के स्नातक डिग्री धारकों द्वारा निर्वाचित सदस्य - राज्य के सरकारी शिक्षकों द्वारा निर्वाचित सदस्य - राज्यपाल द्वारा मनोनीत ( नोट- उत्तर प्रदेश की विधान परिषद् में भी इतने ही सदस्य राज्यपाल द्वारा मनोनीत होते हैं। नोट- मनोनयन का आधार - 5 क्षेत्रों यथा - कला, विज्ञान, साहित्य, समाजसेवा तथा सहकारी आंदोलन/संस्थाएँ आदि में व्यवहारिक अनुभव या विशेष ज्ञान रखने वाले व्यक्तियों को राज्यपाल मनोनीत कर सकता है। नोट- भारत के सिर्फ 7 राज्यों में विधान परिषद् है, और ये सात राज्य हैं- जम्मूकश्मीर, उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश तथा तेलंगाना।