REET 2017 Level 1 Paper

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Question Numbers: 81-85
निर्देश: गांधीजी सत्य और अहिंसा को जीवन में सर्वाधिक महत्त्व देते थे, सत्याग्रह व असहयोग आंदोलन द्वारा उन्होंने अंग्रेजों का मुकाबला किया। गांधीजी सब मनुष्यों को समान मानते थे। धर्म, जाति, सम्प्रदाय, रंग आदि के आधार पर होने वाले भेदभाव को वे मानवता का कलंक मानते थे।
वे आर्थिक असमानता को भी मिटा डालना चाहते थे। वे वर्गविहीन, जातिविहीन समाज में विश्वास रखते थे। सामाजिक न्याय, शारीरिक श्रम को महत्त्व देते थे। गांधीजी प्रजातान्त्रिक राज्य को कल्याणकारी मानते थे। गांधीजी के अनुसार नैतिक आचरण का जीवन में विशेष स्थान होना चाहिए। सत्य, न्याय, धर्म, अहिंसा, अपरिग्रह, निस्वार्थ सेवा को मानवता के लिए सच्ची सेवा मानते थे। उनके राष्ट्रीय तथा अंतर्राष्ट्रीय विचारों में वसुधैव कुटम्बकम का दृष्टिकोण प्रमुख था। उनकी मान्यता थी कि किसी राष्ट्र का समुचित उत्थान अपने, परिवार, जाति गाँव, प्रदेश तथा देश की समस्याओं के सुधार से हो सकता है। स्वयं को सुधारो, सारा विश्व सुधरेगा उनका कहना यही था।
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Question : 81 of 150
 
Marks: +1, -0
“शरीर यात्रा के लिए जितना आवश्यक हो उससे अधिक पैसा, अन्न आदि का न लेना” अर्थ को व्यक्त करने वाला शब्द कौन सा है?
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