REET 2012 Level 1 Paper
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Question Numbers: 68-74
निर्देश: निम्न गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प चुनिए:
जिन लोगों ने गहन साधना करके अपने को सहज नहीं बना लिया, वे सहज भाषा नहीं पा सकते। व्याकरण और भाषा-शास्त्र के बल पर यह भाषा नहीं बनायी जा सकती, कोशों में प्रयुक्त शब्दों के अनुपात पर इसे नहीं गढ़ा जा सकता। कबीरदास और तुलसीदास को यह भाषा मिली थी, महात्मा गाँधी को भी यह भाषा मिली, क्योंकि वे सहज हो सके। उनमें दान करने की क्षमता थी। शब्दों का हिसाब लगाने से यह दातृत्व नहीं मिलता, अपने को दलित द्राक्षा के समान निचोड़कर महासहज के समक्ष समर्पण कर देने से प्राप्त होता है। जो अपने को नि:शेष भाव से नहीं दे सका, वह दाता नहीं हो सकता। आप में अगर देने लायक वस्तु है तो भाषा स्वयं सहज हो जायगी। पहले सहज भाषा बनेगी, फिर उसमें देने योग्य पदार्थ भरे जायेंगे, यह गलत रास्ता है। सही रास्ता यह है कि पहले देने की क्षमता उपार्जन कीजिए। इसके लिए तप की जरूरत है, साधना की जरूरत है, अपने को नि:शेष भाव से दान कर देने की जरूरत है।
निर्देश: निम्न गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प चुनिए:
जिन लोगों ने गहन साधना करके अपने को सहज नहीं बना लिया, वे सहज भाषा नहीं पा सकते। व्याकरण और भाषा-शास्त्र के बल पर यह भाषा नहीं बनायी जा सकती, कोशों में प्रयुक्त शब्दों के अनुपात पर इसे नहीं गढ़ा जा सकता। कबीरदास और तुलसीदास को यह भाषा मिली थी, महात्मा गाँधी को भी यह भाषा मिली, क्योंकि वे सहज हो सके। उनमें दान करने की क्षमता थी। शब्दों का हिसाब लगाने से यह दातृत्व नहीं मिलता, अपने को दलित द्राक्षा के समान निचोड़कर महासहज के समक्ष समर्पण कर देने से प्राप्त होता है। जो अपने को नि:शेष भाव से नहीं दे सका, वह दाता नहीं हो सकता। आप में अगर देने लायक वस्तु है तो भाषा स्वयं सहज हो जायगी। पहले सहज भाषा बनेगी, फिर उसमें देने योग्य पदार्थ भरे जायेंगे, यह गलत रास्ता है। सही रास्ता यह है कि पहले देने की क्षमता उपार्जन कीजिए। इसके लिए तप की जरूरत है, साधना की जरूरत है, अपने को नि:शेष भाव से दान कर देने की जरूरत है।
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Question : 68 of 150
Marks:
+1,
-0
हमारी भाषा की सहजता किस बात पर निर्भर करती है?
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