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Solution:
- वर्ग – उभयजीवी
- जैसा कि नाम से ही पता चलता है (जीआर., एम्फी: द्वि, बायोस, जीवन), उभयचर जलीय और साथ ही स्थलीय निवास में रह सकते हैं।
- उनमें से ज्यादातर के अंगों के दो युग्म होते हैं।
- शरीर सिर और धड़ में विभाजित होता है।
- पूंछ कुछ में उपस्थित हो सकती है।
- उभयचर त्वचा नम (बिना शल्क के) होती है।
- आंखों में पलकें होती हैं।
- मध्यकर्ण कान का प्रतिनिधित्व करता है।
- पोषण नलिका, मूत्र और प्रजनन पथ अवस्कर गुहा नामक एक समान कक्ष में खुलते हैं जो बाहरी भाग में खुलता है।
- श्वसन गलफड़ें, फेफड़े और त्वचा के माध्यम से होता है।
- हृदय तीन-कक्षीय (दो अलिंद और एक निलय) होता है।
- ये ठंडे खून वाले जानवर होते हैं।
- लिंग अलग-अलग होते हैं।
- निषेचन बाह्य होता है।
- ये अंडोत्पन्न होते हैं और इनका विकास अप्रत्यक्ष होता है।
- उदाहरण: बुफो (टॉड), राणा (मेंढक), हायला (ट्री मेंढक), सलामांद्रा (सैलामेंडर), इचिथियोफिस (अंगहीन उभयजीवी)।
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