वर्ष 2000 में राज्य में शासकीय स्रोतों से प्राप्त डेटा के अनुसार, लगभग लाख हेक्टेयर भूमि पर सिचाई होती थी, जो कुल बोये गए क्षेत्र का थी। एक आंकलन के अनुसार, राज्य में 43 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिचाई सुविधा निर्मित की जा सकती है , जिसमें सतही जल से लाख एवं भू जल से लाख हेक्टेयर भूमि की सिचाई की जा सकती है। राज्य गठन के बाद राष्ट्रीय औसत के समकक्ष लाने के लिए शासन द्वारा सिचाई योजनाओं के क्रियान्वयन को उच्च प्राथमिकता दी गई है। प्रदेश में वर्तमान (2013-14) में अब तक कुल लाख हेक्टेयर भूमि पर सिचाई क्षमता सृजित की जा चुकी है, जो कुल बोये गए क्षेत्र का लगभग है। राज्य में मुख्यत: नहर, नलकूप, तालाब एवं कुएँ से सिंचाई की जाती है , जिसका कुल सिचाई में लगभग का योगदान (लगभग 10 लाख हेक्टेयर भूमि पर ) है। राज्य का सबसे सिचित जिला रायपुर (73\% भूमि सिंचित) तथा सबसे कम सिंचित जिला दंतेवाड़ा (0\% भूमि सिंचित ; सिर्फ मानसून पर निर्भर ) है।